53वें कृषि विज्ञान मेले में उन्नत प्रजातियों, मूल्यवर्धन और किसान आय बढ़ाने पर जोर
अल्मोड़ा। हवालबाग स्थित भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र में आयोजित 53वें कृषि विज्ञान मेले में पर्वतीय खेती की चुनौतियों और संभावनाओं पर व्यापक मंथन हुआ। ‘सशक्त और सुपोषित महिला कृषक : विकसित कृषि का आधार’ थीम पर आयोजित मेले में 398 किसानों ने भाग लिया।
मेले का शुभारंभ कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने किया। उन्होंने उत्तराखंड की पारंपरिक बारानाजा पद्धति को मूल्यवर्धन और आधुनिक तकनीक से जोड़ने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की गहत, मसूर, काली सोयाबीन, श्रीअन्न और अन्य स्थानीय फसलों को प्रसंस्करण एवं ब्रांडिंग से बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है।
उन्होंने काफल की शेल्फ लाइफ बढ़ाने, सुगंधित एवं औषधीय पौधों की खेती और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसल प्रजातियों के विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने स्थानीय कृषि उत्पादों के लिए प्रसंस्करण इकाइयों और बाजार व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताया।
संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त ने बताया कि संस्थान अब तक 204 उन्नत प्रजातियां विकसित कर चुका है। इनमें जैव सुदृढ़ीकृत मक्का की वी.एल. त्रिपोषी, वी.एल. सुपोषिता और वी.एल. वीटा जैसी प्रजातियां शामिल हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा विकसित 20 मंडुवा और सात मादिरा प्रजातियां देश के विभिन्न हिस्सों में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
डॉ. कान्त ने बताया कि वी.एल. सब्जी मटर-13 भी उत्तराखंड के साथ देश के अन्य क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन कर रही है। संस्थान द्वारा उर्वरकों की खपत कम करने के लिए विशेष बैक्टीरिया की खोज, वर्षा जल संरक्षण और जल के उचित उपयोग की तकनीकें विकसित की गई हैं।
कृषि में आय बढ़ाने के लिए मशरूम उत्पादन और मौनपालन को भी उपयोगी बताया गया। पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों से फसल सुरक्षा के लिए चेन लिंक और सोलर फेंसिंग के उपयोग की जानकारी भी किसानों को दी गई।
मेले में किसानों के लिए विभिन्न तकनीकी प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए। वैज्ञानिकों ने किसानों को नवीन फसल प्रजातियों, कृषि तकनीकों, जैविक खेती और मूल्यवर्धन के बारे में जानकारी दी। प्रगतिशील किसानों उमेश सिंह, शशि भटनागर, त्रिलोचन राज टम्टा, देवेंद्र सिंह बिष्ट, संगीता देवी, शिवराज सिंह परमार, हीरा देवी और चंचल राम को सम्मानित किया गया।
अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत किसानों को 37 वी.एल. टूलकिट, पांच मंडुवा थ्रैशर, आठ पावर वीडर और 130 तिरपाल वितरित किए गए। मेले में वी.एल. श्रेष्ठा सब्जी मटर प्रजाति तथा चारकोल आधारित वी.एल. बायोजेंट-9 का लोकार्पण किया गया। ‘पर्वतीय कृषि दर्पण’ सहित अन्य प्रकाशनों का विमोचन भी हुआ।
संस्थान ने तकनीकों के व्यवसायीकरण की दिशा में भी कदम बढ़ाया। वी.एल. पॉलीटनल के व्यवसायीकरण के लिए मैसर्स पराशर एग्रोटेक बायो प्राइवेट लिमिटेड, वाराणसी तथा वी.एल. सब्जी मटर-13 के लिए मैसर्स अम्बर एग्रोवेट, रुद्रपुर के साथ समझौते किए गए।
विशिष्ट अतिथि डॉ. ए.के. शर्मा ने जैविक और विषरहित कृषि उत्पादों पर जोर दिया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की परिस्थितियों में किसानों को नई तकनीकों को अपनाने की सलाह दी। डॉ. सी. तिवारी ने कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से उन्नत तकनीकों और प्रजातियों को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।
कृषक गोष्ठी में किसानों ने अपनी समस्याएं वैज्ञानिकों के सामने रखीं, जिनका समाधान विशेषज्ञों ने किया। विभिन्न किसानों ने संस्थान की तकनीकों से हुए अनुभव भी साझा किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनुराधा भारतीय एवं निधि सिंह ने किया।
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