प्रतिष्ठित ‘रूह’ रेस्तरां में संभाली मिष्ठान्न एवं पेस्ट्री प्रमुख की जिम्मेदारी, भारतीय स्वाद को दे रहे अंतरराष्ट्रीय पहचान
अल्मोड़ा। पहाड़ की प्रतिभाएं जब अपनी मेहनत, लगन और हुनर के बल पर सात समंदर पार अपनी पहचान बनाती हैं, तो उनकी उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं रह जाती, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बन जाती है। अल्मोड़ा से जुड़े युवा शेफ दीक्षांत कार्की ने भी कुछ ऐसा ही मुकाम हासिल किया है। उन्हें अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित प्रतिष्ठित भारतीय रेस्तरां ‘रूह’ (ROOH San Francisco) में मिष्ठान्न एवं पेस्ट्री प्रमुख की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है।
दीक्षांत अब ‘रूह’ की मिष्ठान्न रसोई का नेतृत्व करते हुए रेस्तरां के आधुनिक भारतीय व्यंजनों के अनुरूप विशेष मिठाइयों और पेस्ट्री व्यंजनों को नया स्वरूप दे रहे हैं। उनकी पाक-कला की सबसे बड़ी विशेषता पारंपरिक यूरोपीय पेस्ट्री निर्माण तकनीक को आधुनिक भारतीय स्वाद, बनावट और आकर्षक प्रस्तुति के साथ जोड़ना है।
अल्मोड़ा में हुई पढ़ाई, फिर चुनी पाक-कला की राह
दीक्षांत कार्की का अल्मोड़ा से गहरा जुड़ाव रहा है। उपलब्ध व्यावसायिक विवरण के अनुसार उन्होंने अपनी बारहवीं तक की पढ़ाई रैमजे कॉलेज, अल्मोड़ा से की। इसके बाद उन्होंने होटल प्रबंधन की व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त की और आतिथ्य एवं पाक-कला के क्षेत्र को अपने भविष्य के रूप में चुना।
पहाड़ के एक छोटे से नगर में शिक्षा प्राप्त करने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर के पाक जगत तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। इस क्षेत्र में स्वाद के साथ-साथ अनुशासन, धैर्य, तकनीकी दक्षता, सटीकता और निरंतर नए प्रयोग की आवश्यकता होती है। दीक्षांत ने इन्हीं गुणों को अपनी ताकत बनाया।

देश के प्रतिष्ठित होटलों में निखारा हुनर
दीक्षांत ने अपने व्यावसायिक जीवन की मजबूत नींव भारत के प्रतिष्ठित होटल समूहों के साथ काम करते हुए रखी। उन्होंने जयपुर के ट्राइडेंट होटल में औद्योगिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद जयपुर और आगरा में आतिथ्य क्षेत्र का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया।
उनके व्यावसायिक जीवन में महत्वपूर्ण पड़ाव तब आया, जब उन्हें ओबेरॉय समूह के साथ काम करने का अवसर मिला। उन्होंने आगरा के प्रतिष्ठित द ओबेरॉय अमरविलास तथा द ओबेरॉय गुड़गांव में अपनी सेवाएं दीं। यहां उन्हें उच्चस्तरीय आतिथ्य व्यवस्था, उत्कृष्ट भोजन निर्माण, अतिथि सेवा तथा व्यंजनों की आकर्षक प्रस्तुति की बारीकियां सीखने का अवसर मिला।
इतना ही नहीं, उन्हें संयुक्त अरब अमीरात स्थित द ओबेरॉय अल जोराह के विशेष कार्यदल का हिस्सा बनने का अवसर भी प्राप्त हुआ। इससे उनके अनुभव को अंतरराष्ट्रीय विस्तार मिला।
बैंकॉक से समुद्री जहाजों तक पहुंचा हुनर
दीक्षांत की व्यावसायिक यात्रा भारत तक सीमित नहीं रही। अपने हुनर को और निखारने के उद्देश्य से उन्होंने थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भी काम किया।
इसके बाद उन्होंने समुद्री पर्यटन एवं आतिथ्य के क्षेत्र में कदम रखा और कार्निवल क्रूज लाइन्स में पेस्ट्री शेफ के रूप में जिम्मेदारी संभाली। बाद में वे एमएससी क्रूज यॉट क्लब से भी जुड़े।
विशाल समुद्री जहाजों पर अलग-अलग देशों और संस्कृतियों से आने वाले यात्रियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले मिष्ठान्न और पेस्ट्री तैयार करना अपने आप में बड़ी चुनौती होती है। यहां दीक्षांत को बड़े स्तर पर उत्पादन, भोजन सूची तैयार करने तथा विभिन्न देशों के लोगों की पसंद के अनुरूप स्वाद विकसित करने का अनुभव प्राप्त हुआ।
दिल्ली से अमेरिका तक जारी रहा सफर
भारत लौटने के बाद दीक्षांत ने नई दिल्ली के प्रतिष्ठित ऑलिव बार एंड किचन में कनिष्ठ उप-प्रमुख शेफ के रूप में कार्य किया। यहां आधुनिक यूरोपीय पाक शैली के बीच उन्होंने अपने अनुभव को और समृद्ध किया।
इसके बाद उनकी प्रतिभा उन्हें अमेरिका ले गई। न्यू जर्सी स्थित अंदाज़ रेस्तरां एंड कैटरर्स में उन्होंने पेस्ट्री उप-प्रमुख शेफ के रूप में जिम्मेदारी संभाली। यहां भोजन सूची तैयार करने से लेकर उच्चस्तरीय आयोजनों के लिए विशेष मिष्ठान्न तैयार करने तक उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अब भारतीय स्वाद को दे रहे आधुनिक वैश्विक स्वरूप
सैन फ्रांसिस्को के ‘रूह’ में दीक्षांत कार्की की नई जिम्मेदारी उनके व्यावसायिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
यहां उनकी भूमिका केवल मिठाइयां अथवा पेस्ट्री तैयार करने तक सीमित नहीं है। उनका प्रयास ऐसे मिष्ठान्न तैयार करना है, जो रेस्तरां के आधुनिक भारतीय भोजन की पूरी यात्रा को अंतिम व्यंजन तक उसी भाव और पहचान के साथ आगे बढ़ाएं।
दीक्षांत की शैली में पारंपरिक यूरोपीय पेस्ट्री तकनीक की सटीकता और भारतीय स्वाद की आत्मा का अनूठा संगम दिखाई देता है। स्वाद, बनावट, सुगंध, रंग और प्रस्तुति—इन सभी को संतुलित करते हुए वे भारतीय स्वाद को आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
अल्मोड़ा के युवाओं के लिए प्रेरणा
दीक्षांत कार्की की उपलब्धि अल्मोड़ा और उत्तराखंड के उन युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है, जो परंपरागत व्यवसायों से हटकर होटल प्रबंधन, पाक-कला, बेकरी और मिष्ठान्न निर्माण जैसे क्षेत्रों में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।
कभी अल्मोड़ा में शिक्षा प्राप्त करने वाला एक युवा आज अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में अपने हुनर से भारतीय स्वाद की नई व्याख्या कर रहा है। इस उपलब्धि के पीछे वर्षों का प्रशिक्षण, देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य का अनुभव और लगातार कुछ नया सीखने की ललक रही है।
अल्मोड़ा से शुरू हुई दीक्षांत कार्की की यह यात्रा आज सैन फ्रांसिस्को तक पहुंच चुकी है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि प्रतिभा यदि मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखने की इच्छा से जुड़ जाए, तो पहाड़ से निकला हुनर भी विश्व पटल पर अपनी अलग पहचान बना सकता है।

