अल्मोड़ा, भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा में राजभाषा हिन्दी के प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर हिन्दी कार्यशाला आयोजित की गई। “प्रशासनिक कार्य में राजभाषा हिन्दी का कार्यान्वयन” विषयक इस कार्यशाला की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल के संयुक्त निदेशक (राजभाषा) श्री धीरज शर्मा ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. लक्ष्मी कान्त ने कहा कि प्रशासनिक कार्यों में हिन्दी का प्रयोग केवल राजभाषा संबंधी दायित्व नहीं, बल्कि कार्यों को अधिक सुगम और प्रभावी बनाने का माध्यम भी है। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा राजभाषा के प्रयोग एवं प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संसदीय राजभाषा निरीक्षण समिति के लगभग दो वर्ष पूर्व हुए निरीक्षण में संस्थान ने सभी निर्धारित मानकों पर संतोषजनक प्रदर्शन किया था।
उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान के सभी विभाग एवं अनुभाग राजभाषा नियमों के अनुपालन के लिए प्रतिबद्ध हैं। नराकास, अल्मोड़ा के अंतर्गत आने वाले 32 कार्यालयों में भी राजभाषा नियमों के प्रति जागरूकता एवं अनुपालन बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।
धीरज शर्मा ने अपने व्याख्यान में हिन्दी के विकास की ऐतिहासिक यात्रा और राजभाषा के रूप में उसकी संवैधानिक स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने भाषा को प्रभावी अभिव्यक्ति और आपसी संवाद का माध्यम बताते हुए प्रशासनिक कार्यों में सरल एवं सहज हिन्दी के प्रयोग पर जोर दिया।
उन्होंने संविधान के संबंधित अनुच्छेदों, अंकों के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप तथा राजभाषा कार्यान्वयन से जुड़े विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने हिन्दी के संदर्भ में प्रधानमंत्री द्वारा प्रयुक्त 12 महत्वपूर्ण शब्दों—प्रेरणा, प्रोत्साहन, पुरस्कार, प्रेम, प्रशिक्षण, प्रचार, प्रसार, प्रबंधन, प्रयास, प्रमोशन, प्रयोग एवं प्रतिबद्धता—का उल्लेख करते हुए राजभाषा के प्रति निरंतर प्रयास और प्रतिबद्धता की आवश्यकता बताई।
मुख्य वक्ता ने राजभाषा विभाग के वार्षिक लक्ष्यों, तिमाही प्रगति रिपोर्ट, हिन्दी समिति की बैठकों, कार्यशालाओं तथा संसदीय निरीक्षण प्रश्नावली से संबंधित तकनीकी जानकारी भी साझा की।
कार्यशाला का संचालन प्रभारी अधिकारी (राजभाषा) श्रीमती रेनू सनवाल ने किया। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक, अधिकारी एवं प्रशासनिक वर्ग के कार्मिक उपस्थित रहे। कार्यशाला के माध्यम से प्रशासनिक कार्यों में राजभाषा हिन्दी के सहज एवं अधिकाधिक प्रयोग के लिए उपयोगी जानकारी प्रदान की गई।
हिन्दी के व्यावहारिक प्रयोग से प्रशासनिक कार्यों को और प्रभावी बनाने पर बल
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