अल्मोड़ा। हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर उत्तराखंड प्रेस क्लब अल्मोड़ा में आयोजित संगोष्ठी में हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक यात्रा, उसकी उपलब्धियों तथा वर्तमान दौर की चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की गई। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता हिंदी और कुमाउनी साहित्य के प्रतिष्ठित विद्वान एवं कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. देव सिंह पोखरिया रहे।
अपने उद्बोधन में प्रो. पोखरिया ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का इतिहास संघर्ष, समर्पण और समाज सेवा की मिसाल है। उन्होंने कहा कि 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित ‘उदंत मार्तंड’ से शुरू हुई हिंदी पत्रकारिता आज विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनमत तैयार करने और लोगों में राष्ट्रीय चेतना जगाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, जनसमस्याओं को सामने लाने और शासन-प्रशासन को जवाबदेह बनाने में हिंदी पत्रकारिता अग्रणी रही है।
प्रो. पोखरिया ने पत्रकारिता के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कार ने ज्ञान और सूचना के प्रसार को नई गति दी। इसके बाद समाचार पत्रों ने समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य किया। हिंदी पत्रकारिता ने न केवल समाचारों का प्रसार किया बल्कि हिंदी भाषा और साहित्य को भी समृद्ध बनाया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और विशेष रूप से अल्मोड़ा का हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यहां से प्रकाशित ‘अल्मोड़ा अखबार’, ‘शक्ति’, ‘स्वाधीन प्रजा’ और ‘समता’ जैसे पत्रों ने सामाजिक परिवर्तन और जनजागरण में अहम भूमिका निभाई। इन समाचार पत्रों ने पहाड़ की समस्याओं और जनता की आवाज को प्रभावी ढंग से सामने रखा।
उन्होंने वर्तमान दौर की पत्रकारिता पर चर्चा करते हुए कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने पत्रकारिता के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। अब समाचारों का प्रसार कुछ ही क्षणों में दुनिया भर में हो जाता है। लेकिन इस तेजी के बीच पत्रकारों को सत्यता, विश्वसनीयता और नैतिक मूल्यों का विशेष ध्यान रखना होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रेस क्लब अध्यक्ष जगदीश जोशी ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी आज के पत्रकारों पर है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को निष्पक्षता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
सचिव अशोक पांडे ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिंदी पत्रकारिता दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और इसकी मजबूती देश के लोकतांत्रिक ढांचे को सुदृढ़ बनाती है।
संगोष्ठी में उपस्थित पत्रकारों ने भी अपने विचार साझा किए और पत्रकारिता के मूल्यों को बनाए रखने का संकल्प दोहराया। वक्ताओं ने कहा कि बदलते तकनीकी दौर में भी पत्रकारिता का उद्देश्य सत्य को सामने लाना और समाज के हितों की रक्षा करना ही होना चाहिए।
कार्यक्रम में पी.सी. तिवारी, सुरेश तिवारी, हरीश चंद्र भंडारी, संतोष बिष्ट, कपिल मल्होत्रा, किशन जोशी, संजय अग्रवाल, अमित उप्रेती, रोहित भट्ट, दिनेश भट्ट, जगजीवन सिंह बिष्ट, हर्षवर्धन पांडे, शुभम जोशी, दयाकृष्ण कांडपाल तथा हेमराज सिंह चौहान सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।
उदंत मार्तंड से सोशल मीडिया तक : हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्ष की गौरवगाथा पर मंथन
Leave a Comment
