नाटक से आशुभाषण तक विद्यार्थियों ने किया शानदार प्रदर्शन
हल्द्वानी। लामाचौड़ स्थित के.वी.एम. पब्लिक स्कूल बुधवार को संस्कृतमय नजर आया। उत्तराखण्ड संस्कृत संस्थान के तत्वावधान में आयोजित जनपद स्तरीय संस्कृत प्रतियोगिता-2026 का दीप प्रज्वलन के साथ शुभारम्भ हुआ। प्रतियोगिता में जिले के विभिन्न विकासखण्डों से पहुंचे छात्र-छात्राओं ने संस्कृत की विविध विधाओं में शानदार प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गजराज सिंह बिष्ट ने दीप प्रज्वलित कर प्रतियोगिता का शुभारम्भ किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. यशोदा प्रसाद सेमवाल सहित विद्यालय प्रबंधन, शिक्षक एवं संस्कृत शिक्षा से जुड़े गणमान्य लोग मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत भारतीय ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण भाषा है तथा युवा पीढ़ी को इससे जोड़ना समय की आवश्यकता है।
07 अक्टूबर को कनिष्ठ तथा 08 अक्टूबर को वरिष्ठ वर्ग की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। प्रतियोगिता में संस्कृत नाटक, समूहगान, वाद-विवाद, आशुभाषण और श्लोकोच्चारण जैसी विधाओं को शामिल किया गया है।
आयोजन में संस्कृत नाटक के लिए 15 विद्यालय, समूहगान में 14, वाद-विवाद में 12, आशुभाषण में 10 तथा श्लोकोच्चारण में 08 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। मंच पर विद्यार्थियों ने संस्कृत में प्रभावशाली संवाद, गायन, भाषण और श्लोक प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
आयोजकों के अनुसार प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में संस्कृत संभाषण, उच्चारण, अभिनय, गायन, तर्क-वितर्क तथा मंचीय अभिव्यक्ति के कौशल को विकसित करना है। साथ ही भारतीय संस्कृति एवं जीवन-मूल्यों के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता पैदा करना भी प्रतियोगिता का प्रमुख उद्देश्य है।
जनपद संयोजक डॉ. हेमचन्द्र जोशी ने कहा कि संस्कृत भारत की ज्ञान परम्परा और सांस्कृतिक चेतना की आधारशिला है। प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच मिलने के साथ उनमें संस्कृत के प्रति आत्मीयता भी विकसित होती है। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रतिभागी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया।
आयोजन में सह-संयोजक डॉ. राजेन्द्र भट्ट के साथ भगवान सिंह बोरा, यशवंत सिंह, डॉ. कैलाश चन्द्र सिंह नेगी, प्रिया कुमारी, कुसुमपाल, माया एवं अन्य सदस्यों ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
संस्कृत के मंच पर गूंजे श्लोक, गीत और तर्क
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