दिल्ली-मुंबई के कलाकार भी देंगे प्रस्तुतियां, 23 सितंबर को निकलेगा मां नंदादेवी का भव्य डोला
अल्मोड़ा। मां नंदादेवी के जयकारों और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से अल्मोड़ा एक बार फिर सराबोर होने जा रहा है। ऐतिहासिक मां नंदादेवी मेला इस वर्ष 16 से 23 सितंबर तक आयोजित होगा। आठ दिवसीय मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ स्थानीय लोक संस्कृति, संगीत और मनोरंजन के कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
मेले की तैयारियों को लेकर मां नंदादेवी मंदिर परिसर में मेला समिति की पत्रकार वार्ता हुई। समिति ने बताया कि मंदिर परिसर और एडम्स मैदान में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शुभारंभ के अवसर पर शोभायात्रा निकाली जाएगी। स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक दलों को कार्यक्रमों में प्राथमिकता देते हुए उन्हें अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। इसके साथ ही दिल्ली और मुंबई से कलाकारों को भी आमंत्रित किया जा रहा है।
नंदादेवी मेले की धार्मिक परंपराओं में कदली वृक्ष आमंत्रण का अपना विशेष महत्व है। 17 सितंबर को मां नंदादेवी की प्रतिमा निर्माण के लिए कदली वृक्षों को आमंत्रित किया जाएगा। 18 सितंबर को अष्टमी के दिन इन वृक्षों को मंदिर परिसर में लाया जाएगा। इसके बाद परंपरागत धार्मिक विधि-विधान के अनुसार कदली वृक्षों से मां नंदादेवी की प्रतिमा तैयार की जाएगी।
समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि नंदादेवी मेला अल्मोड़ा की पहचान और सदियों पुरानी लोक परंपराओं का महत्वपूर्ण प्रतीक है। मेले में स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है। आयोजन को व्यवस्थित और आकर्षक बनाने के लिए आवश्यक तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मेले के दौरान अल्मोड़ा की लोक कला और सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। बाहरी कलाकारों की प्रस्तुतियों के माध्यम से अन्य क्षेत्रों की कला और संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी।
23 सितंबर को मां नंदादेवी के डोले की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। डोले के विसर्जन के साथ आठ दिवसीय मेले का समापन होगा।
पत्रकार वार्ता में अध्यक्ष मनोज वर्मा, सचिव मनोज सनवाल, सांस्कृतिक संयोजक अर्जुन बिष्ट, संरक्षक अनूप साह, रवि गोयल, मुन्ना वर्मा, राजेंद्र बिष्ट, जगत तिवारी आदि मौजूद रहे।
16 सितंबर से शुरू होगा ऐतिहासिक नंदादेवी मेला, कदली वृक्ष परंपरा रहेगी आकर्षण
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