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रानीखेत के द प्लेज़ेंट वैली स्कूल में अखंड रामायण पाठ एवं रामलीला परंपरा ने रचा सांस्कृतिक चेतना का नया अध्याय

भावना मल्होत्रा
Last updated: April 23, 2026 7:20 am
भावना मल्होत्रा
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The continuous recitation of Ramayana and the tradition of Ramlila at The Pleasant Valley School in Ranikhet have created a new chapter in cultural consciousness.
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📰 समाचार रिपोर्ट
संवाददाता: विशेष प्रतिनिधि

रानीखेत, उत्तराखंड।
हिमालय की शांत, पवित्र और सुरम्य वादियों के बीच स्थित द प्लेज़ेंट वैली स्कूल आज केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का एक सशक्त केंद्र बनकर उभर रहा है। देवदार के घने वृक्षों से आच्छादित इस प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर परिसर में शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। विशेष रूप से नवरात्र के पावन अवसर पर यहाँ आयोजित होने वाली रामलीला और धार्मिक आयोजन इसे एक विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।

विद्यालय में प्रतिवर्ष नवरात्र के दौरान आयोजित रामलीला केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह एक जीवंत आध्यात्मिक अनुभव और नैतिक शिक्षा का माध्यम बन चुकी है। इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांतों—धर्म, सत्य, कर्तव्य और मर्यादा—का गहन ज्ञान प्राप्त होता है।

इसी क्रम में, दिनांक 18 एवं 19 अप्रैल 2026 को विद्यालय परिसर स्थित हनुमान मंदिर में 24 घंटे का “श्री अखंड रामायण पाठ” अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ। यह आयोजन अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर पूर्ण हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

इस दिव्य आयोजन में विद्यालय के शिक्षकगण—मोनिका जोशी, नीलम शर्मा, अश्विन कुमार, नितिन सिंह बर्तवाल, करीना एवं हिमानी अधिकारी—ने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने न केवल आयोजन की व्यवस्थाओं को संभाला, बल्कि श्रद्धालुओं की सेवा में भी पूर्ण समर्पण का परिचय दिया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण बना कि संस्कृति केवल पुस्तकों में सीमित नहीं होती, बल्कि उसे जीवन में अपनाना ही उसका वास्तविक स्वरूप है।

कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, कर्मचारियों तथा स्थानीय जनसमुदाय की व्यापक उपस्थिति रही। सभी ने श्रद्धा और भक्ति के साथ इस आयोजन में भाग लेकर इसे एक सामूहिक सांस्कृतिक उत्सव का रूप प्रदान किया।

इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और अधिक बढ़ाया। सुप्रसिद्ध भोजपुरी कवि डॉ. संतोष पटेल एवं उनकी धर्मपत्नी रानू ने अपनी साहित्यिक उपस्थिति से आयोजन को विशेष ऊँचाई प्रदान की। उनके आगमन से कार्यक्रम में सांस्कृतिक और साहित्यिक रंग और भी गहरा हो गया।

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. ज्वाला प्रसाद, पूर्व निदेशक, गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, भारत सरकार, ने अपने विचारों से कार्यक्रम को वैचारिक गहराई प्रदान की। उन्होंने भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए विद्यालय के इस प्रयास की सराहना की। उल्लेखनीय है कि उन्हें महात्मा गांधी की 155वीं जयंती के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है।

इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ पत्रकार ईश मलिक, जो वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष हैं, तथा प्रतिष्ठित शिक्षाविद् एवं कॉर्पोरेट स्कूल संचालक पुनीत यादव भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को व्यापक सामाजिक और बौद्धिक आयाम प्रदान किया।

अखण्ड रामायण पाठ के दौरान बजरंग दल एवं विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिली। इसके साथ ही, दिल्ली के कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने भी इस आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित कीं, जिनमें वरिष्ठ विधायक श्री जितेन्द्र महाजन का नाम प्रमुख रहा।

विद्यालय की सबसे बड़ी विशेषता इसकी रामलीला परंपरा है, जो प्रत्येक वर्ष नवरात्र के दौरान पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजित की जाती है। यह आयोजन केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यह विद्यार्थियों के लिए एक जीवंत शिक्षण प्रक्रिया है। रामायण की कथा यहाँ केवल पढ़ाई नहीं जाती, बल्कि उसे मंच के माध्यम से अनुभव किया जाता है।

रामलीला के माध्यम से विद्यार्थियों को न केवल अभिनय कौशल का विकास होता है, बल्कि वे भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और रावण जैसे पात्रों के माध्यम से जीवन के गहन नैतिक और दार्शनिक पहलुओं को समझते हैं। यह प्रक्रिया उन्हें परंपरा का केवल अनुयायी नहीं, बल्कि उसका सजग व्याख्याकार बनाती है।

आज के वैश्वीकरण और तेज़ी से बदलते सामाजिक परिवेश में जहाँ सांस्कृतिक पहचान धूमिल होती जा रही है, वहाँ इस प्रकार के आयोजन भारतीय परंपराओं को जीवित रखने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। विद्यालय की यह पहल एक सशक्त संदेश देती है कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव भी उतना ही आवश्यक है।

रामायण में अच्छाई और बुराई के संघर्ष को विद्यालय में केवल एक साधारण कथा के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाता, बल्कि इसे एक गहन जीवन-दर्शन के रूप में समझाया जाता है। विद्यार्थियों को यह सिखाया जाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य, ईमानदारी और धर्म का मार्ग कैसे चुना जाए।

इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसका सामूहिक स्वरूप है। इसमें शिक्षक, विद्यार्थी, अभिभावक और स्थानीय समाज सभी मिलकर भाग लेते हैं, जिससे यह एक सामूहिक सांस्कृतिक उत्सव बन जाता है। सामूहिक मंत्रोच्चार, भक्ति भाव और सहयोग की भावना इस आयोजन को और अधिक प्रभावशाली बनाती है।

नवरात्र और रामलीला का यह समन्वय शक्ति और धर्म के संतुलन का प्रतीक है। यह संदेश देता है कि वास्तविक प्रगति वही है जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी हो और जिसमें नैतिकता एवं विवेक का समावेश हो।

विद्यालय का यह प्रयास न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए प्रेरणास्रोत भी है। यह आने वाली पीढ़ियों को केवल शैक्षणिक रूप से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक रूप से भी सशक्त बनाने का कार्य कर रहा है।

अंततः, द प्लेज़ेंट वैली स्कूल यह सिद्ध करता है कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है। यह संस्थान एक सच्चे “सांस्कृतिक राजदूत” के रूप में कार्य करते हुए नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कार और मूल्यों से जोड़ने का सराहनीय कार्य कर रहा है।

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