टैक्सी यूनियन ने प्रशासन पर उठाए गंभीर सवाल, महासचिव नीरज पवार और कार्यालय प्रभारी विनोद बिष्ट बोले—पूर्व सूचना के बिना रूट बदलना समझ से परे
अल्मोड़ा। भगवान विश्वकर्मा की शोभायात्रा को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। टैक्सी यूनियन के महासचिव नीरज पवार और कार्यालय प्रभारी विनोद बिष्ट ने आरोप लगाया कि शोभायात्रा के लिए अनुमति होने के बावजूद उसे निर्धारित मार्ग एलआर साह रोड से नहीं जाने दिया गया। इतना ही नहीं, रूट में अचानक बदलाव कर दिया गया, जिसकी पूर्व सूचना टैक्सी यूनियन और संबंधित लोगों को नहीं दी गई। अचानक बदली यातायात व्यवस्था के कारण थपलिया टैक्सी स्टैंड क्षेत्र में अफरातफरी मच गई और जाम की स्थिति पैदा हो गई।
टैक्सी यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि प्रशासन को यदि निर्धारित मार्ग में किसी कारण से बदलाव करना था तो इसकी सूचना पहले से संबंधित पक्षों को दी जानी चाहिए थी। लेकिन ऐन मौके पर रूट बदलने से न केवल शोभायात्रा की व्यवस्था प्रभावित हुई, बल्कि टैक्सी संचालन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ।
अनुमति के बावजूद रूट क्यों बदला?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शोभायात्रा के लिए अनुमति दी गई थी और हर वर्ष मार्ग निर्धारित था, तो आखिर अंतिम समय में एलआर साह रोड का रूट क्यों बदल दिया गया? प्रशासन के पास यदि सुरक्षा या यातायात से जुड़ा कोई ठोस कारण था तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए था।
टैक्सी यूनियन पदाधिकारियों के मुताबिक, अचानक रूट परिवर्तन ने मौके पर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी। वाहन चालकों को यह समझने में परेशानी हुई कि उन्हें किस मार्ग से जाना है और कहां से यातायात डायवर्ट किया गया है। इसका असर सीधे थपलिया टैक्सी स्टैंड और आसपास के इलाकों की यातायात व्यवस्था पर पड़ा।
यूनियन का सवाल है कि क्या यातायात व्यवस्था बनाने के लिए पहले से कोई वैकल्पिक प्लान तैयार किया गया था? यदि था तो उसे समय रहते लागू क्यों नहीं किया गया और प्रभावित लोगों को जानकारी क्यों नहीं दी गई?
थपलिया टैक्सी स्टैंड पर बिगड़े हालात
रूट परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर थपलिया टैक्सी स्टैंड क्षेत्र में देखने को मिला। टैक्सी चालकों के अनुसार, अचानक बदली व्यवस्था के कारण वाहनों का दबाव बढ़ गया और देखते ही देखते जाम लग गया। इससे टैक्सी चालकों के कई फेरे प्रभावित हुए और यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
टैक्सी यूनियन का कहना है कि चालक रोजाना की कमाई पर निर्भर रहते हैं। यातायात व्यवस्था में अचानक बदलाव और जाम के कारण उनका समय और ईंधन दोनों बर्बाद हुए। कई चालक निर्धारित समय में अपने फेरे पूरे नहीं कर पाए, जिसका सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ा।
पदाधिकारियों का आरोप है कि यदि रूट परिवर्तन की जानकारी पहले से होती तो चालक अपने संचालन की योजना उसी हिसाब से बना सकते थे। लेकिन बिना सूचना के अचानक व्यवस्था बदलने से पूरा भार टैक्सी चालकों पर पड़ गया।
टीएसआई की भूमिका पर भी सवाल
मामले में टैक्सी यूनियन ने यातायात व्यवस्था संभाल रहे टीएसआई की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि शोभायात्रा जैसे बड़े आयोजन के दौरान यातायात पुलिस की जिम्मेदारी होती है कि वह पहले से रूट डायवर्जन, बैरिकेडिंग और वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
यदि निर्धारित मार्ग में बदलाव जरूरी था तो यातायात पुलिस को इसकी जानकारी पहले से सार्वजनिक करनी चाहिए थी। यूनियन का आरोप है कि इस मामले में बेहतर समन्वय का अभाव दिखाई दिया, जिसके कारण थपलिया क्षेत्र में अव्यवस्था पैदा हुई।
हालांकि, इस संबंध में संबंधित टीएसआई अथवा प्रशासन की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है। इसलिए रूट परिवर्तन के वास्तविक कारण और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
प्रशासन से सीधे सवाल
टैक्सी यूनियन ने प्रशासन से कई सवालों का जवाब मांगा है। यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि जनता और टैक्सी चालकों को यह जानने का अधिकार है कि अनुमति मिलने के बाद निर्धारित मार्ग में बदलाव किस आधार पर किया गया।
सवाल यह हैं कि—
पहला, एलआर साह रोड से शोभायात्रा को क्यों नहीं जाने दिया गया?
दूसरा, रूट बदलने का निर्णय किस अधिकारी या स्तर पर लिया गया?
तीसरा, यदि रूट परिवर्तन पहले से तय था तो टैक्सी यूनियन और अन्य प्रभावित लोगों को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई?
चौथा, थपलिया टैक्सी स्टैंड पर जाम से निपटने के लिए क्या वैकल्पिक यातायात योजना बनाई गई थी?
पांचवां, यातायात अव्यवस्था के कारण टैक्सी चालकों को हुए आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
इन सवालों का जवाब मिलना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि सार्वजनिक आयोजनों के दौरान प्रशासनिक निर्णयों का सीधा प्रभाव आम नागरिकों और स्थानीय परिवहन व्यवस्था पर पड़ता है।
सूचना तंत्र पर भी सवाल
रूट परिवर्तन को लेकर सबसे गंभीर मुद्दा प्रशासन के सूचना तंत्र का है। किसी धार्मिक शोभायात्रा के मार्ग में बदलाव सामान्य निर्णय नहीं होता। इसका प्रभाव हजारों लोगों की आवाजाही पर पड़ सकता है। ऐसे में यदि रूट बदलना आवश्यक हो तो संबंधित विभागों, आयोजन समिति, टैक्सी यूनियन, व्यापारियों और आम जनता को समय रहते जानकारी देना जरूरी है।
टैक्सी यूनियन का कहना है कि बिना पूर्व सूचना के अचानक लिया गया निर्णय ही अव्यवस्था का प्रमुख कारण बना। यदि प्रशासन पहले से सूचना जारी करता और वैकल्पिक मार्ग स्पष्ट करता तो संभवतः वाहन चालक और आम लोग उसी अनुसार अपनी आवाजाही की योजना बना सकते थे।
अब प्रशासन के जवाब का इंतजार
भगवान विश्वकर्मा की शोभायात्रा को लेकर सामने आए इस विवाद ने यातायात व्यवस्था से आगे बढ़कर प्रशासनिक समन्वय और निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। टैक्सी यूनियन पदाधिकारी पूरे मामले में स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन के सामने अब यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि निर्धारित मार्ग में बदलाव आखिर क्यों किया गया और इसकी सूचना पहले क्यों नहीं दी गई। यदि सुरक्षा अथवा यातायात संबंधी कोई गंभीर कारण था तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं यदि समस्या केवल समन्वय की कमी के कारण पैदा हुई, तो भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी होगा।
फिलहाल टैक्सी यूनियन के आरोपों के बीच रूट परिवर्तन का कारण और प्रशासन की तैयारी सवालों के घेरे में है। थपलिया टैक्सी स्टैंड पर पैदा हुई अफरातफरी और जाम ने यह जरूर दिखा दिया कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों के लिए अंतिम समय में लिए गए फैसले किस तरह आम लोगों और टैक्सी चालकों के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं।
अब निगाहें प्रशासन के आधिकारिक जवाब पर हैं। प्रशासन को स्पष्ट करना होगा कि अनुमति के बावजूद निर्धारित रूट क्यों बदला गया और प्रभावित टैक्सी चालकों को पूर्व सूचना क्यों नहीं दी गई। तभी इस पूरे विवाद पर स्थिति साफ हो सकेगी।
अनुमति के बाद भी रोकी गई शोभायात्रा! अचानक रूट बदलने से थपलिया टैक्सी स्टैंड पर अफरातफरी, जाम से टैक्सी चालकों को नुकसान
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