अल्मोड़ा। मेहनत, समर्पण और शोध के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम तब ऐतिहासिक बन जाता है जब वह किसी संस्थान के इतिहास में पहली बार दर्ज हो। ऐसा ही एक गौरवपूर्ण क्षण सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के गणित विभाग में देखने को मिला, जब शोधार्थी डॉ. पुष्पा बोरा को विभाग की पहली पीएच.डी. उपाधि प्रदान की गई।
यह उपलब्धि केवल एक शोधार्थी की व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि पूरे गणित विभाग और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। विश्वविद्यालय परिवार ने इस उपलब्धि को अकादमिक उत्कृष्टता की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया है।
डॉ. पुष्पा बोरा ने अपना शोधकार्य प्रो. जया उप्रेती के निर्देशन में पूर्ण किया। प्रो. उप्रेती गणित शिक्षा और शोध के क्षेत्र में लंबे समय से योगदान देती रही हैं तथा विश्वविद्यालय में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व भी निभा चुकी हैं। उनके मार्गदर्शन में पूर्ण हुआ यह शोधकार्य गणित एवं अवकल ज्यामिति के क्षेत्र में विशेष महत्व रखता है।
शोधकाल के दौरान डॉ. बोरा ने भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की WISE-KIRAN योजना के अंतर्गत महिला वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया। उन्होंने न केवल शोध कार्य किया बल्कि अकादमिक गतिविधियों और ज्ञान-विस्तार कार्यक्रमों में भी सक्रिय योगदान दिया।
पीएच.डी. की मौखिक परीक्षा के दौरान विश्वविद्यालय का वातावरण उत्साह और गर्व से भरा हुआ दिखाई दिया। कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट, कुलसचिव डॉ. डी.एस. बिष्ट, परिसर निदेशक प्रो. पी.एस. बिष्ट सहित अनेक शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने इस अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
बाह्य परीक्षक प्रो. राजेन्द्र प्रसाद ने शोधकार्य की गुणवत्ता की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह शोध गणित के क्षेत्र में सार्थक योगदान देने वाला है। उन्होंने कहा कि शोध में विषय की गहराई और विश्लेषण की गुणवत्ता उच्च स्तर की है।
कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय में शोध की संस्कृति को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गणित विभाग की पहली पीएच.डी. उपाधि भविष्य के शोधार्थियों को प्रेरित करेगी और विश्वविद्यालय में अनुसंधान की नई संभावनाओं को जन्म देगी।
विश्वविद्यालय के शिक्षकों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल एक डिग्री तक सीमित नहीं है बल्कि यह उस अकादमिक वातावरण का परिणाम है, जिसमें विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाले शोध के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
डॉ. पुष्पा बोरा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने गुरु प्रो. जया उप्रेती, विश्वविद्यालय प्रशासन, बाह्य परीक्षक, विभागीय शिक्षकों, परिवार और सहयोगियों को दिया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग और मार्गदर्शन के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ गणित विभाग ने अपने विकास की नई यात्रा शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय परिवार को उम्मीद है कि आने वाले समय में और अधिक शोधार्थी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय का नाम रोशन करेंगे।
डॉ. पुष्पा बोरा ने रचा इतिहास, एसएसजे विश्वविद्यालय के गणित विभाग को मिली पहली पीएच.डी.
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