राज्य सरकार को दस्तावेज पेश करने के लिए मिला समय, 3 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
नैनीताल। गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी से जुड़े एफआईआर निरस्तीकरण के मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से महत्वपूर्ण दस्तावेज तलब किए हैं। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई में अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 183 के तहत दर्ज बयानों को न्यायालय के रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
उच्च न्यायालय में WPCRL/2167/2026 के रूप में दर्ज इस याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से एफआईआर निरस्त करने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले से जुड़े बयानों को महत्वपूर्ण मानते हुए राज्य सरकार के अधिवक्ता को इन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा।
अदालत ने राज्य सरकार को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए समय दिया है। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 नवंबर 2026 की तारीख तय की गई है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 183 मजिस्ट्रेट द्वारा बयान और संस्वीकृति दर्ज किए जाने से संबंधित है। इस प्रावधान के तहत दर्ज बयानों को न्यायालय के अभिलेख पर लाने के निर्देश के बाद अब मामले की अगली सुनवाई में इन दस्तावेजों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
इस सुनवाई में याचिकाकर्ता, राज्य सरकार और प्रतिवादी संख्या तीन की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने न्यायालय में पक्ष रखा।
उल्लेखनीय है कि 30 अक्टूबर को हुई सुनवाई में उच्च न्यायालय ने एफआईआर निरस्त करने के संबंध में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। अब सभी की निगाहें 3 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें राज्य सरकार द्वारा धारा 183 के तहत दर्ज बयानों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है।
पप्पू गिरधारी की एफआईआर पर हाईकोर्ट का अहम निर्देश, धारा 183 के बयान तलब
Leave a Comment

