देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ राजनेता भुवन चंद खंडूरी का निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे उत्तराखंड सहित राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे खंडूरी अपने सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, ईमानदार छवि और अनुशासित कार्यशैली के लिए जाने जाते थे।
भुवन चंद खंडूरी उत्तराखंड की राजनीति के एक मजबूत स्तंभ माने जाते थे। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए राज्य में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों को आगे बढ़ाया। उनके नेतृत्व में प्रदेश में पारदर्शी शासन और विकास योजनाओं को नई दिशा मिली। जनता के बीच उनकी छवि एक साफ-सुथरे और कर्मठ नेता की रही।
खंडूरी का राजनीतिक जीवन बेहद लंबा और प्रेरणादायक रहा। वे भारतीय सेना में अपनी सेवाएं देने के बाद राजनीति में आए और राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाई। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद उन्होंने प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विकास के मुद्दों को हमेशा प्राथमिकता दी।
वह वर्तमान उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतू भूषण खंडूरी के पिता थे। उनके निधन पर विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय की ओर से गहरा शोक व्यक्त किया गया है। शोक संदेश में कहा गया कि भुवन चंद खंडूरी का जीवन जनसेवा, ईमानदारी और समर्पण का प्रतीक था तथा उनका निधन प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है।
पूर्व मुख्यमंत्री के निधन की सूचना मिलते ही विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कई नेताओं ने कहा कि खंडूरी ने अपने सिद्धांतों और कार्यशैली से राजनीति में एक अलग मिसाल कायम की। उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
प्रदेशभर में उनके समर्थकों और शुभचिंतकों के बीच शोक का माहौल है। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं और उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों को याद कर रहे हैं।
भुवन चंद खंडूरी के निधन को उत्तराखंड की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनके अनुभव, नेतृत्व क्षमता और जनहित के प्रति समर्पण ने उन्हें जनता के बीच विशेष सम्मान दिलाया। राज्य के राजनीतिक इतिहास में उनका नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा।
