जागेश्वर/अल्मोड़ा। प्राचीन एवं विश्व प्रसिद्ध जागेश्वर धाम की धार्मिक गरिमा, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से मुख्य पुजारी श्री ज्योतिर्लिंग जागेश्वर धाम एवं महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज (कैलाश चन्द्र भट्ट) ने प्रशासन को नौ सूत्रीय जन-सुझाव पत्र सौंपा है। इस पत्र में मंदिर क्षेत्र की पवित्रता, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग, पुजारियों की सुविधाओं तथा प्रबंधन व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।
ज्ञापन में कहा गया है कि जागेश्वर धाम उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यवस्थाओं का विस्तार और आधुनिकीकरण समय की आवश्यकता बन चुका है।
मुख्य पुजारी ने धाम के आसपास शराब, मांस, मीट और अंडों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक क्षेत्र की मर्यादा बनाए रखने के लिए यह कदम आवश्यक है। साथ ही मंदिर परिसर में नशे की हालत में प्रवेश करने वालों पर प्रतिबंध लगाने और नियम उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई है।
यातायात और पार्किंग की समस्या का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि त्योहारों और विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए बलढोटी मैदान को विकसित कर आधुनिक पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए मंदिर परिसर में कम से कम चार पुलिस कर्मियों की स्थायी तैनाती का सुझाव दिया गया है। उनका मानना है कि इससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण मिलेगा और किसी भी आकस्मिक स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध हो सकेगी।
ज्ञापन में पुजारियों के लिए चेंजिंग रूम की व्यवस्था को भी आवश्यक बताया गया है। वर्तमान में ऐसी सुविधा के अभाव में उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही रात्रिकालीन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुजारियों के गांवों तक जाने वाले मार्गों पर सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग की गई है।
मुख्य पुजारी ने कहा कि कई मार्ग घने जंगलों से होकर गुजरते हैं और वन्यजीवों का खतरा बना रहता है। प्रकाश व्यवस्था होने से पुजारियों के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों को भी लाभ मिलेगा।
उन्होंने मंदिर प्रबंधन समिति के शीघ्र पुनर्गठन की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनका कहना है कि लंबे समय से समिति का गठन न होने के कारण कई योजनाएं और विकास कार्य प्रभावित हुए हैं। समिति के गठन से प्रशासनिक कार्यों में गति आएगी और विकास योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो सकेगा।
धार्मिक वातावरण की गरिमा बनाए रखने के लिए मंदिर परिसर में एक संतुलित एवं सम्मानजनक ड्रेस कोड लागू करने का सुझाव भी दिया गया है। इसके अलावा वर्षों से सेवा दे रहे पुरोहितों को सहायक पुजारी के रूप में पंजीकृत करने की मांग रखी गई है ताकि उनकी सेवाओं को औपचारिक मान्यता मिल सके।
अंत में कैलाशानंद महाराज ने प्रशासन से आग्रह किया कि जनभावनाओं और धाम की प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए इन सुझावों पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाए। उनका कहना है कि इन व्यवस्थाओं के लागू होने से जागेश्वर धाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श तीर्थस्थल के रूप में और अधिक सशक्त पहचान बना सकेगा।
जागेश्वर धाम के समग्र विकास के लिए उठी आवाज, मुख्य पुजारी ने प्रशासन को भेजा 9 सूत्रीय सुझाव पत्र
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