अल्मोड़ा।
उत्तराखंड की राजनीति में महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व महासचिव एवं पूर्व दर्जा राज्य मंत्री एडवोकेट केवल सती ने इस विषय को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रेस को जारी अपने बयान में कहा कि धामी सरकार को आगामी विधानसभा के विशेष सत्र में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए ठोस और स्पष्ट कदम उठाने चाहिए।
सती ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2023 में सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण विधेयक का नोटिफिकेशन 16 अप्रैल 2026 को जारी किया जा चुका है, जिससे यह कानून अब प्रभावी हो चुका है। ऐसे में उत्तराखंड सरकार के सामने यह एक महत्वपूर्ण अवसर है कि वह राज्य स्तर पर भी इस कानून को लागू कर महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में समान भागीदारी सुनिश्चित करे।
उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी वास्तव में महिला सशक्तिकरण के प्रति गंभीर हैं, तो उन्हें 70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा में से 33 प्रतिशत सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव विशेष सत्र में लाना चाहिए। सती ने इसे केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता का विषय बताया।
सती ने कहा कि लंबे समय से महिलाएं राजनीति में पर्याप्त प्रतिनिधित्व से वंचित रही हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में उचित स्थान मिले। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण केवल संख्या बढ़ाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह समाज में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने का माध्यम भी है।
कांग्रेस पार्टी के रुख को स्पष्ट करते हुए सती ने कहा कि पार्टी इस विधेयक का पूर्ण समर्थन करती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष सहित सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों ने यह निर्णय लिया है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर सदन के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभाएगी।
सती ने धामी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा अक्सर महिला सशक्तिकरण की बात करती है, लेकिन जब ठोस कदम उठाने की बात आती है तो पीछे हट जाती है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार अपनी नीतियों और घोषणाओं के बीच की दूरी को खत्म करे।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि धामी सरकार इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल नहीं लाती है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार महिलाओं के मुद्दों को लेकर गंभीर नहीं है। इससे राज्य की महिलाओं में गलत संदेश जाएगा और सरकार की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
सती ने यह भी कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, वहां उन्हें राजनीतिक निर्णयों में भी समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाएं न केवल परिवार, बल्कि समाज और राज्य के विकास में भी अहम भूमिका निभाती हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आगामी चुनावों में भी प्रमुख भूमिका निभा सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि धामी सरकार इस विषय पर क्या रुख अपनाती है और क्या वह विशेष सत्र में इस दिशा में कोई ठोस पहल करती है।
फिलहाल, केवल सती के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है, जो आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।
