संवाददाता, अल्मोड़ा
अल्मोड़ा। जनपद में सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, उत्तराखंड देहरादून के दिशा-निर्देशों के क्रम में प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविन्द पांगती के मार्गदर्शन में यह अभियान संचालित किया जा रहा है।
अभियान के तहत हवालबाग, चौखुटिया, द्वाराहाट, स्याल्दे, सल्ट, ताकुला एवं नैसियाछाना ब्लॉकों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों को संस्थागत प्रसव के लाभों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश पुरोहित ने बताया कि संस्थागत प्रसव का अर्थ है प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में किसी चिकित्सा संस्थान में सुरक्षित प्रसव कराना। उन्होंने कहा कि अस्पताल में प्रसव के दौरान किसी भी जटिल स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं, जिससे माँ और शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। इसके विपरीत घरेलू प्रसव में कई प्रकार की जटिलताएं उत्पन्न होने का खतरा बना रहता है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया गया कि जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत संस्थागत प्रसव पर 1400 रुपये की एकमुश्त सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही प्रसव के दौरान निशुल्क दवाएं, भोजन एवं जांच की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
वहीं ईजा बोई योजना के अंतर्गत प्रसव के बाद 48 घंटे तक अस्पताल में ठहरने पर 2000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है। इसके अतिरिक्त गर्भवती महिलाओं के आवागमन के लिए 108 एवं 102 एंबुलेंस सेवाएं भी निःशुल्क उपलब्ध हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले में शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करना तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य यह है कि हर गर्भवती महिला सुरक्षित रूप से अस्पताल तक पहुंचे और उसे सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें न केवल जागरूकता फैला रही हैं, बल्कि योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।
