‘बेर’ और ‘भगनौल’ को मिलेगा विशेष मंच, मां-बेटी से लेकर सास-बहू तक दिखाएंगी युगल नृत्य
अल्मोड़ा। ऐतिहासिक श्री नंदा देवी मेला-2026 इस बार मनोरंजन के साथ कुमाऊँ की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का सशक्त मंच बनने जा रहा है। मेला समिति ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है और माँ के पूजन पक्ष की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। इस बार मेले में कई नई प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल किए गए हैं।
मेला समिति के मुख्य संयोजक तारा चन्द्र जोशी ने बताया कि मेले को इस वर्ष अधिक भव्य और आकर्षक स्वरूप देने के साथ स्थानीय कलाकारों तथा उत्तराखंड की लोक संस्कृति को व्यापक मंच उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है।
मुख्य सांस्कृतिक संयोजक अर्जुन सिंह बिष्ट चीमा के अनुसार 23 अगस्त को सुबह 11 बजे श्री नंदा देवी मंदिर प्रांगण में नृत्य एवं गायन प्रतियोगिताओं के ऑडिशन होंगे। जूनियर और सीनियर वर्ग में नृत्य तथा हिंदी एवं कुमाऊँनी गायन प्रतियोगिताओं के लिए प्रतिभाओं का चयन किया जाएगा। चयनित गायन प्रतिभागियों को मंदिर समिति द्वारा वाद्य यंत्रों के साथ 10 दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मेले की शुरुआत इस बार मेहंदी और ऐपन प्रतियोगिता से होगी। वहीं पहली बार युगल नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इसमें मां-बेटी, सास-बहू और पिता-पुत्र की जोड़ियां प्रतिभाग कर सकेंगी। इसके साथ ही लाफ्टर शो प्रतियोगिता में स्थानीय हास्य कलाकारों के अलावा विद्यालयी छात्र-छात्राएं भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
मेले में विद्यालयी सांस्कृतिक शोभायात्रा, महिला सांस्कृतिक शोभायात्रा, झोड़ा सांस्कृतिक शोभायात्रा, झोड़ा प्रस्तुति एवं प्रतियोगिता, माता की चौकी, भजन संध्या और सूचना एवं संस्कृति विभाग के सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुतियां होंगी। प्रत्येक दिन उत्तराखंड के स्टार कलाकारों और स्थानीय कलाकारों की स्टार नाइट, ओपन माइक तथा महिलाओं की खेलकूद प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी।
समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि पिछले वर्ष नृत्य एवं गायन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी इस वर्ष उन्हीं प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। हालांकि ऐसे प्रतिभाशाली कलाकारों के लिए अलग विशेष मंच उपलब्ध कराया जाएगा।
कलाकारों और सांस्कृतिक दलों के लिए भी मेले में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर रहेगा। इच्छुक कलाकार, सांस्कृतिक दल या प्रतिभागी 24 अगस्त तक मंदिर समिति एवं मेला समिति को अपनी जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं।
मेले की सबसे खास पहल के तहत नगर के प्रमुख पारंपरिक स्थलों पर कुमाऊँ की विलुप्त होती लोक सांस्कृतिक विधाओं ‘बेर’ और ‘भगनौल’ की प्रस्तुतियां कराई जाएंगी। इन कार्यक्रमों में दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के कलाकारों के साथ स्थानीय और अतिथि कलाकार भी प्रतिभाग करेंगे। पारंपरिक कुमाऊँनी वाद्य यंत्रों की धुनों के साथ विशेष कुमाऊँनी स्टार नाइट भी आयोजित की जाएगी।
सभी प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रम श्री नंदा देवी मंदिर प्रांगण एवं एडम्स मैदान में होंगे। समिति का लक्ष्य नंदा देवी मेले को उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपरा और स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले एक बड़े सांस्कृतिक उत्सव के रूप में स्थापित करना है।
