अल्मोड़ा ।भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा में “विश्व बौद्धिक सम्पदा दिवस” के अवसर पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त की अध्यक्षता में आयोजित यह कार्यक्रम हाइब्रिड माध्यम (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कृषि शोधों के विधिक संरक्षण तथा पर्वतीय कृषि में बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति वैज्ञानिकों एवं कृषकों को जागरूक करना रहा।कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त ने मुख्य वक्ता एवं विशिष्ट विषय विशेषज्ञ डॉ. एस.के. वर्मा का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इसके पश्चात आईटीएमयू के अध्यक्ष डॉ. एन.के. हेडाऊ ने अपने स्वागत संबोधन में बौद्धिक संपदा की वैश्विक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए संस्थान की उपलब्धियों का संक्षिप्त उल्लेख किया।कार्यशाला के प्रथम सत्र में डॉ. एस.के. वर्मा (भूतपूर्व प्रधान वैज्ञानिक, आईसीएआर-एनबीपीजीआर एवं आईआईवीआर) ने “कृषि में बौद्धिक सम्पदा” विषय पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने ‘पौधा किस्म संरक्षण एवं कृषक अधिकार’ (PPV&FR) नियमों की विस्तार से जानकारी देते हुए पादप संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों को सरल भाषा में समझाया।द्वितीय सत्र में संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आर.के. खुल्बे ने “भौगोलिक उपदर्शन” (Geographical Indications) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और उनके कानूनी संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, तृतीय सत्र में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनुराधा भारतीय ने “कृषक किस्म का पंजीकरण” विषय पर तकनीकी प्रस्तुति देते हुए पंजीकरण प्रक्रिया को सहज तरीके से स्पष्ट किया।अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. लक्ष्मी कान्त ने कहा कि वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में कृषि अनुसंधान को पेटेंट एवं बौद्धिक संपदा अधिकारों के माध्यम से सुरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने वैज्ञानिकों से नवाचार के साथ-साथ उनके विधिक संरक्षण पर भी ध्यान देने का आह्वान किया।इस अवसर पर संस्थान एवं प्रक्षेत्र हवालबाग के 38 वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं के साथ कृषि विज्ञान केन्द्र उत्तरकाशी से 6 तथा कृषि विज्ञान केन्द्र बागेश्वर से 8 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से सहभागिता की। परिचर्चा के दौरान प्रतिभागियों ने बौद्धिक संपदा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपनी जिज्ञासाएं रखीं, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया।कार्यक्रम का संचालन आईटीएमयू के सह-अन्वेषक डॉ. के.के. मिश्रा ने किया, जबकि अंत में डॉ. गौरव वर्मा ने सभी आगंतुकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
