9 महीने से वेतन भुगतान नहीं, न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान का आरोप; विभागीय अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल
अल्मोड़ा। बीएसएनएल अल्मोड़ा में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों ने विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ गंभीर मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि विभागीय स्तर पर श्रम कानूनों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है और कर्मचारियों का आर्थिक शोषण चरम पर पहुंच चुका है। कई कर्मचारियों को पिछले नौ महीनों से वेतन नहीं मिला है, जबकि नए टेंडर में तय न्यूनतम मजदूरी से भी कम भुगतान किया जा रहा है।
कर्मचारियों के अनुसार बीएसएनएल द्वारा जारी नए कांट्रैक्ट में प्रतिदिन 522.52 रुपये न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की गई है। इसके अलावा पीएफ और ईएसआई का अलग प्रावधान भी किया गया है, लेकिन ठेकेदार श्रमिकों को केवल लगभग 9000 रुपये मासिक दे रहे हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पीएफ और ईएसआई की राशि भी सही तरीके से जमा नहीं की जा रही।
बीटीएस कार्यों से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि पिछले नौ महीनों से भुगतान लंबित है। कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें केवल “जल्द भुगतान” का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन हकीकत में कोई कार्रवाई नहीं होती।
पुराने ठेकेदारों — जय श्री राम और मोहन मशीनरी — पर भी कर्मचारियों ने पीएफ जमा न करने के आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों ने कहा कि वर्षों तक काम करने के बावजूद उनके भविष्य की सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया।
वेतन न मिलने से कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। कई कर्मचारियों ने बताया कि वे कर्ज लेकर परिवार चला रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और दैनिक खर्च पूरे करना मुश्किल हो गया है।
कर्मचारियों ने कहा कि सरकार जहां संविदा कर्मचारियों के हितों की बात करती है, वहीं बीएसएनएल में हर साल आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन में कटौती की जा रही है। इससे कर्मचारियों का मनोबल टूट चुका है।
कर्मचारियों ने विभाग से मांग की है कि लंबित वेतन का तत्काल भुगतान कराया जाए, पीएफ और ईएसआई घोटाले की जांच हो तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
